यह "आरक्षण हटाओ संघर्ष " भारत में एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। इसकी शुरुआत 1970 के दशक में हुई, जब छात्रों और लोक आंदोलनों ने वर्ण आधारित आरक्षित नीतियों को हटाने की मांग की। प्रमुख कारण समावेशनary प्रतिनिधित्व की कमी और प्रतिस्पर्धा में समानता का अभाव था। इस आंदोलन ने राजनीतिकीय ध्रुवीकरण को बढ़ाया